September 25, 2021

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Age Relaxation in Govt Jobs In Uttarakhand

अपनी जान की बाजी लगा​कर दो छात्रो को डूबने से बचाने वाली महिला शिक्षक को भूली सरकार

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रिपोर्ट । एसएस कपकोटी
खबर देहरादून । हर वर्ष देश भर में 5 सितंबर को उप-राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन की जयंती शिक्षक दिवस के रूप में मनाई जाती है। इस दिन शिक्षकों को उनके प्रयासों और उनकी मेहनत को याद किया जाता है,क्योकि शिक्षक मानव जीवन का एक ऐसा प्रकाश है जो हर प्रकार से अंधेरे को दूर कर रोशनी देता है और एक दिशा दिखाता है।और अपने शिष्यों के लिए हर तरह मुशीबत का सामना कर उसे समाज में एक योग्य मानव बनाता है। ऐसा ही एक उदहारण पेस किया दून की जांबाज शिक्षिका स्व. संगीता अग्रवाल के परिवार ने जिसने अपने प्राणों की परवाह न करके उफनते हुए नदी में डूब रहे दो बच्चो को बचाकर अपनी जान दे दी।
बताते चलें कि स्व. संगीता अग्रवाल दून के हल्दूवाला के प्राधमिक विद्यालय में शिक्षिका थीं। 2011 में स्कूल से लौटते वक्त उफनती नदी में फंसे दो छात्रों की जान बचाते हुए संगीता का निधन हो गया। इस साहस के लिए उन्हें मरणोपरांत राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजा गया और सरकार की ओर से घोषणा भी की गई कि संगीता की पुत्री के बालिग होने के बाद मृतक आश्रित कोटे में सरकारी नौकरी दी जाएगी, परन्तु आज 10 बीत जाने के बाद भी मानसी नौकरी नहीं मिल पाई ।
मृतक शिक्षिका के पति संजीव अग्रवाल ने बताया कि हाल ही में उन्होंने युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी मुलाकात की थी। इस पर उन्होंने शिक्षा सचिव को मानसी को सेवायोजित करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अभी भी इस संबंध में शासन की ओर से कोई कार्यवाही नहीं की गई है।

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