November 16, 2021

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महंगाई कम करने के नाम पर सत्ता पर आयी वर्तमान सरकार भूल चुकी अपनी प्रतिबद्धता कौन सुने जनता की गुहार

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अल्मोड़ा। दिन पर दिन बड़ी बेतहाशा महंगाई ने गरीब मध्यवर्गीय परिवारों का जीना मुहाल कर दिया है एक तरफ आय के साधन की उपलब्धता न होने दूसरी ओर महंगाई लगातार चरम पर ऐसे में आम आदमी के लिए 2 जून की रोटी मुनासिब हो रही है लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने और महंगाई को कम करने को लेकर सत्ता में आयी भाजपा सरकार आज महंगाई कम करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भूल चुकी है। ऐसा लगता है कि सरकारों का मुख्य उद्देश्य अब चुनाव जीत कर दलीय स्थिति को मजबूत करना ही रह गया है, क्योंकि जिस तरीके से महंगाई बढ़ती जा रही है और चुनाव नजदीक है उसके बाद चुनाव में अनाप-शनाप खर्चे किया जाएगा, उद्योगपतियों को मनमानी छूट दी जा रही है ,आधुनिकरण विकास के नाम पर बड़ी बड़ी योजनाओं पर पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है जिससे आम आदमी पर लगातार ​करो का भार बढ़ता जा रहा है एक ओर कोरोना के कारण लोगों की नौकरियां छूट गई आय के साधन बंद हैं वहीं दूसरी ओर बढ़ती हुई महंगाई ने आम आदमी का जीना मुश्किल कर दिया है लेकिन सरकारों का इस ओर ध्यान नहीं है अभी तक कोई भी ऐसा ठोस कदम सरकार की ओर से नहीं उठाया गया है जिससे महंगाई नियंत्रण में आ सके।

सरकार को आम आदमी की परेशानी से कोई लेना-देना नहीं

लोगों का कहना है कि इस सरकार को आम आदमी की परेशानी से कोई लेना-देना नहीं है आम आदमी के लिए रोजमर्रा की चीजें बेतहाशा बढ़ती जा रही है दो वक्त की रोटी जुटाने मुश्किल हो रही है और सरकार ऐसे काम कर रही है जो कि आम आदमी की पहुंच से दूर है। उधर सरकार द्वारा की गई घोषणाओं का जमीनी स्तर पर कोई भी आधार नहीं दिख रहा है स्वरोजगार के लिए आज भी आदमी विभागों के चक्कर लगाता है दर-दर की ठोकरें खा रहा है एक आम आदमी इस बात को कहां जा कर कहे,देखा जा रहा है कि आज भी जिसके लगाने को पैसा है काम भी उसी का हो रहे है। आम गरीब आदमी की बातें कही भी नहीं सुनी जा रही है। दूसरी ओर देखें तो ग्राम प्रधान से लेकर मंत्री तक सभी जनप्रतिनिधि दिन पर दिन मालामाल होते जा रहे हैं, तो ऐसे में आम जनता की सुनने वाला कौन है।म​हंगायी की मार तो आम लोगों को ही झेलनी है, विकास के नाम पर जिस तरीके से योजनाओं में पैसा पानी की तरह बहाए जा रहा है और कुछ ही समय बाद वह कार्य पूर्व की भांति नजर आते हैं फिर उन्हीं कार्यों पर फिर पैसा बहाया जाता है इस तरीके से राज्य को पैसे की तंगहाली की ओर धकेला जा रहा है। महंगाई बढ़ नहीं रही है बढ़ाई जा रही है अनाप-शनाप सरकारी खर्चे राजनेताओं के मनमाने खर्चे और बड़ी-बड़ी योजनाओं जो जनहित से कोसों दूर हैं पर पानी की तरह पैसा बहाना सब महंगाई को बढ़ाने के कारक है। सरकार को जल्द से जल्द ठोस कदम उठाना चाहिए, यदि महंगाई पर रोक नहीं लगाई गई तो हालत और भी गंभीर हो जाएंगे।

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